कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन-सी आरती करें? जानिए पूजा के बाद आरती का सही तरीका

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Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर भक्त दिनभर व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा, अभिषेक, भोग और आरती करने से भक्त भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

जन्माष्टमी पर कौन-सी आरती करें?

जन्माष्टमी की पूजा के बाद भगवान श्रीकृष्ण की आरती करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण की प्रचलित आरती कर सकते हैं। सबसे लोकप्रिय आरतियों में “आरती कुंज बिहारी की” शामिल है।

इसके अलावा भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की आराधना करते समय उनकी स्तुति और आरती भी की जा सकती है।

जन्माष्टमी पर आरती कब करें?

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा आमतौर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मध्यरात्रि में की जाती है। इस दौरान बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक, नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर श्रृंगार, भोग अर्पित करने के बाद आरती की जाती है।

आरती के दौरान घर के सभी सदस्य भगवान के सामने दीपक जलाकर श्रद्धा से प्रार्थना कर सकते हैं।

आरती से पहले करें ये काम

जन्माष्टमी पर आधी रात की पूजा के लिए पहले पूजा स्थान को साफ करके भगवान कृष्ण की मूर्ति या लड्डू गोपाल को सुंदर वस्त्र पहनाएं। इसके बाद—

  • भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें।
  • साफ जल से स्नान कराएं।
  • पीले या नए वस्त्र पहनाएं।
  • चंदन, फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
  • माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
  • धूप और दीप जलाएं।
  • श्रीकृष्ण के मंत्र या नाम का जाप करें।
  • अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें।

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष भोग

भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री के अलावा दूध, दही, फल, पंजीरी और अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है। भोग में तुलसी दल रखना भी वैष्णव परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

आरती के बाद क्या करें?

आरती पूरी होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें। यदि आपने व्रत रखा है तो व्रत खोलने का समय अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा के अनुसार रखें, क्योंकि जन्माष्टमी के पारण का समय स्थान और परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।

महत्वपूर्ण बात

आरती में सबसे ज्यादा महत्व श्रद्धा और भक्ति का माना जाता है। इसलिए यदि आपको पूरी आरती याद नहीं है तो भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेकर सरल शब्दों में भी प्रार्थना कर सकते हैं।

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