Mirzapur News :- अहरौरा स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर से आयोजित होने वाले श्री ठाकुर जी के ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले का दूसरा दिन सोमवार को कुश्ती दंगल के नाम रहा। अहरौरा बांध के समीप स्थित प्राकृतिक स्टेडियम में आयोजित विशाल दंगल में दूर-दराज से पहुंचे पहलवानों ने अपने दमखम और शानदार दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया।
मेले की परंपरा के अनुसार पहले दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधिका जी की भव्य रथयात्रा निकाली गई थी। फूल-मालाओं से सजे रथ पर भगवान श्रीकृष्ण और राधिका जी नगर भ्रमण के लिए निकले और श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।
राधाकृष्ण मंदिर से निकला भव्य रथ
रथयात्रा शाम करीब चार बजे अहरौरा स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर से शुरू हुई। मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण और राधिका जी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और आरती उतारने के बाद रथयात्रा को रवाना किया।
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फूल-मालाओं से सजे रथ ने सत्यानगंज, चौक बाजार, तकिया, खरंजा, सम्मेतर, त्रीमुहानी और दक्षिणी नाका सहित नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण किया। देर रात रथ दुर्गा जी पहाड़ पहुंचा।
रथयात्रा के दौरान नगरवासियों ने जगह-जगह रथ को रोककर भगवान को फूल-मालाएं अर्पित कीं, आरती उतारी और प्रसाद चढ़ाया। पूरे मार्ग में “वृंदावन बिहारी लाल की जय” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालु उत्साह के साथ रथ को खींचते हुए आगे बढ़ते रहे। धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ खींचने को पुण्य से जोड़कर देखा जाता है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग इस परंपरा में शामिल हुए।
Mirzapur News : दुर्गा जी पहाड़ पर रातभर हुआ कजली दंगल
देर रात भगवान श्रीकृष्ण और राधिका जी का रथ दुर्गा जी पहाड़ पहुंचा, जहां कदम्ब के वृक्ष के नीचे भगवान विराजमान हुए। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान में रातभर कजली दंगल का आयोजन किया गया।
मीरजापुर की प्रसिद्ध कजली की धुनों ने पूरी रात माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संगीत प्रेमी कजली के रंग में सराबोर नजर आए।
मेले के दौरान पूरे नगर में अलग ही रौनक दिखाई दी। खिलौनों, फूल-मालाओं और पूजा सामग्री की दुकानें सजी रहीं। बच्चों में भी मेले को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
Mirzapur News : दूसरे दिन कुश्ती दंगल में दिखा पहलवानों का दम
मेले के दूसरे दिन परंपरानुसार अहरौरा बांध स्थित प्राकृतिक स्टेडियम में विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। दंगल देखने के लिए भारी भीड़ जुटी और एक के बाद एक मुकाबलों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
पहलवानों ने मिट्टी के अखाड़े में ताकत, तकनीक और अनुभव का शानदार प्रदर्शन करते हुए विभिन्न दांव-पेंच आजमाए। कई मुकाबले बेहद रोमांचक रहे और दर्शकों ने तालियों व उत्साहवर्धन के साथ पहलवानों का हौसला बढ़ाया।
दंगल की सबसे बड़ी कुश्ती 10 हजार रुपये की रही, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
Mirzapur News : नाहर सिंह और जयप्रकाश उर्फ लटकू ने निभाई रेफरी की भूमिका
कुश्ती दंगल के दौरान नाहर सिंह और जयप्रकाश उर्फ लटकू पहलवान ने रेफरी की जिम्मेदारी संभाली। उनके निर्देशन में विभिन्न मुकाबले संपन्न कराए गए।
इस अवसर पर स्थल कमेटी के राजकुमार अग्रहरी, पारस नाथ केशरी, अशोक अग्रहरी, विजय अग्रहरी और सुरेश जायसवाल पूरे समय दंगल स्थल पर मौजूद रहे। कमेटी के सदस्यों ने विजेता पहलवानों को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

Mirzapur News : दंगल स्थल पर पहुंचे ठाकुर जी, किया मुकाबलों का अवलोकन
दोपहर करीब दो बजे के बाद श्री ठाकुर जी का रथ आरती के पश्चात दुर्गा जी पहाड़ से रवाना होकर कुश्ती दंगल स्थल पहुंचा। परंपरा के अनुसार रथ यहां कुछ समय तक रुका और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भगवान के समक्ष दंगल का आयोजन जारी रहा।
श्रद्धालुओं ने इसे आस्था और परंपरा से जुड़ा विशेष अवसर बताया। घंटों तक रथ के दंगल स्थल पर रहने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान के दर्शन किए।
Mirzapur News : बनवारी सिंह के आवास पर हुआ नाच-गाना
दंगल स्थल से आगे बढ़ते हुए श्री ठाकुर जी का रथ बनवारी सिंह के आवास पहुंचा। यहां भगवान के सम्मान में श्रद्धा और उत्साह के साथ नाच-गाने का आयोजन किया गया।
काफी समय तक यहां धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे। इसके बाद रात करीब 10 बजे श्री ठाकुर जी का रथ परंपरा के अनुसार कन्हैयालाल के गोले पहुंचा।
कन्हैयालाल के गोले में रात्रि विश्राम
कन्हैयालाल के गोले में श्री ठाकुर जी के रथ का रात्रि विश्राम हुआ। तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले के अंतिम दिन रथ परंपरानुसार अगले पड़ाव के लिए रवाना होगा और साहू बैजनाथ प्रसाद के आवास पहुंचेगा।
अहरौरा का यह ऐतिहासिक मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। रथयात्रा, कजली दंगल और कुश्ती प्रतियोगिता जैसी परंपराएं इस आयोजन को खास बनाती हैं और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
